सोमवार 29 जून 2026 - 15:01
श्रीनगर में रहमतुन लिल आलमीन फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित मजलिस मे शिया- सुन्नी उलेमा का उम्मत की एकता और कर्बला के संदेश पर बल

जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में रहमतुन लिल आलमीन फाउंडेशन के तत्वावधान में शहीदान-ए-कर्बला की याद में मजलिस-ए-अज़ा का आयोजन किया गया, जिसमें शिया और सुन्नी विचारधाराओं के प्रतिष्ठित उलेमा, क़ारी, सामाजिक हस्तियों तथा समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े लोगों ने भाग लिया।

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी की रिपोर्ट के अनुसार, जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में रहमतुल्लिल आलमीन फाउंडेशन के तत्वावधान में शहीदान-ए-कर्बला की स्मृति में मजलिस-ए-अज़ा आयोजित की गई। इसमें शिया और सुन्नी दोनों विचारधाराओं के प्रमुख उलेमा, क़ुरआन के क़ारी, सामाजिक हस्तियों तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भाग लिया। वक्ताओं ने इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की महान कुर्बानी को सत्य, न्याय, धैर्य और अत्याचार के विरुद्ध अडिग रहने का शाश्वत प्रतीक बताते हुए मुस्लिम उम्मत की एकता, सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी सम्मान को बढ़ावा देने पर जोर दिया।

श्रीनगर के रावलपोरा क्षेत्र में रहमतुल्लिल आलमीन फाउंडेशन के अध्यक्ष शेख फिरदौस अली के निवास पर शहीदान-ए-कर्बला की स्मृति में मजलिस-ए-हुसैनी का आयोजन किया गया। इसमें शिया और सुन्नी दोनों विचारधाराओं के वरिष्ठ उलेमा, क़ुर्आन के क़ारी, सामाजिक हस्तियों तथा जीवन के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों ने भाग लिया।

इस मजलिस में आगा सैयद अली मुसवी, मौलाना अबू तुराब, डॉ. मशरू, मौलाना शाहिद, मौलाना नईम अहमद ख़ान, मौलाना मोमिन हुसैन, डॉ. इरशाद हुसैन, हाजी लाल दीन मीर, यूसुफ़ हुसैनी, मोहम्मद अशरफ़ ख़ान, डॉ. वहीद रज़ा, आगा सैयद क़ासिम मुसवी, मौलाना तालिब, समीर साहब, साजिद हुसैन तथा लब्बैक ख़ामेनेई विंग के सदस्यों सहित अनेक सम्मानित व्यक्तियों ने सहभागिता की।

वक्ताओं ने अपने संबोधनों में कहा कि कर्बला की घटना सत्य, न्याय, त्याग, धैर्य और अत्याचार के विरुद्ध दृढ़ता का ऐसा सार्वभौमिक संदेश है, जो हर युग में मानवता का मार्गदर्शन करता रहेगा। उन्होंने कहा कि हज़रत इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम की शिक्षाएँ मनुष्य को न्यायप्रियता, नैतिक साहस और सत्य पर अडिग रहने की प्रेरणा देती हैं।

उलेमा ने एकता, भाईचारे और आपसी सम्मान को वर्तमान समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बताते हुए कहा कि कर्बला का संदेश किसी एक विचारधारा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी मानवता के लिए शांति, न्याय और सौहार्दपूर्ण सह-अस्तित्व का संदेश है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे उन तत्वों से सावधान रहें जो नफ़रत, अशांति और सांप्रदायिकता फैलाकर जम्मू-कश्मीर की सदियों पुरानी धार्मिक सौहार्द की परंपरा को नुकसान पहुँचाना चाहते हैं।

कार्यक्रम के अंत में रहमतुल्लिल आलमीन फाउंडेशन के अध्यक्ष शेख फिरदौस अली ने सभी उलेमा, क़ारियों, सामाजिक हस्तियों और प्रतिभागियों का आभार व्यक्त करते हुए जम्मू-कश्मीर में शांति, एकता और समृद्धि के लिए दुआ की। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में मोमिनों का संगठित और एकजुट रहना समय की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने यह भी कहा कि रहमतुल्लिल आलमीन फाउंडेशन मुस्लिम एकता, सांप्रदायिक सद्भाव तथा समाज के सामूहिक कल्याण के लिए निरंतर सक्रिय रूप से कार्य कर रहा है।

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